भागती ज़िंदगी
हर सुबह की घंटी जैसे जंग का किया है ऐलान ।
नींद को कुर्बान कर, काम पर चलता है इंसान।।
कदम दर कदम, बस ढूंढे मंज़िल की तलाश ।
सांसें भी थकें, पर दिल कहे — "और कर प्रयास ।।
कॉफ़ी की चुस्की में ढूंढता है सुकून की तलाश ।
लंबी ट्रैफिक की भीड़ में, खोता है विश्वास।।
फाइलों के ढेर में, दबे रह गए हैं ख्वाब ।
इन मुस्कराते चेहरों के पीछे, छुपे हुए है जवाब।।
फोन की बज रही घंटियाँ, ओर मीटिंग का शोर ।
रिश्ते भी अब लगने लगे है , हो कोई कोरपोरट डोर।।
वक़्त के पीछे भाग रहे ,निकल रहे हैं दिन-रात।
भागदौड़ में खुद से ही खुद की ,नहीं हो पाती बात ।।
कभी ठहर के देखो, और ज़रा साँस लो ।
ज़िंदगी की किताब में , कुछ पन्ने तो खोलो।
हर लम्हा कीमती है, यू मत इसको गंवाओ ।
इस भागदौड़ की जिंदगी में , खुद को मत खो जाओ।।
अपनो के लिए भी समय निकाल कर दिया करो ।
दो कप चाय शांति से , उनके साथ पिया करो ।।
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