बाबा साहेब भीमराव पर कविता
शेरनी को दूध शिक्षा , पढ़वाडो ही दहाडेगो ।
पापी पाखंडी को पाखंड उतारेगो।।
हा भीमराव का गुण गाओ ,शिक्षा की आगी बंदी में ।
नही तो मार कचाटो ,धूब खोदती नंदी में ।।
अब नमन करो बाबा भीमराव कु ,रच दिया भारत को संविधान।
और पिछड़ों को अधिकार दिलाया , दलितों को सम्मान।।
भीमराव का गुण.............
तेने शिक्षा को अधिकार दिलाओ , बणगा ने अधिकारी ।
और स्वतंत्रता का जीवन जीती, मेरे वतन की नारी ।।
अब (भई)मानवता का पाठ पढ़ाया ,दिलाया मौलिक तो अधिकार ।
बाबा साहब थारी घर घर में तो, हो रही जय जय कार।।
जय भीम तो बोलो, या भारत को भाग्य विधाता रे।
बच्चा बच्चा भी, तेरे ही गुण गाता रे।।
जैसे पवित्र गीता और कुरान, वतन का लिखती एक विधान।
सारी तकलीफो का समाधान, राष्ट्र अखंडता का बखान।।
एकता की इसमें पहचान ,हर भारतवासी का मान सम्मान।
यही प्रार्थना और अजान ,याको दुनिया करे गुणगान।।
दे दिया अधिकारों का वरदान, धर्मनिरपेक्षता का संघान।।
अरे धर्मनिरपेक्षता का संबान।
निर्माण में 12 समितियों का अवदान।।
अब (भई )2 साल 11 महीने 18 दिन में ,बनगो ने सुजान।
और नमन करो बाबा भीमराव कु ,रच दियो भारत का संविधान ।।

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