पिता जी याद में कविता

छांव थे वो धूप में, साया थे सर्दी की रातों में ।

सुनकर भी डॉट पापा की , मजा आता था उनकी बातों में ।।


बिना कहे जो सब समझते, नजरों से पढ़ लेते हाल चाल।

खुद रह गए अधूरे पर, पर हमें  कर गए मालामाल ।।


मिला उनका हमे आशीर्वाद , जैसे हो भगवान का हाथ है।

 जब नहीं हैं हमारे बीच में ,  कुछ छूट गया हमारा  साथ है ।।


जो डांट में भी प्यार था , वो अब  समझ में आ गई ।,

ऐसी बीमारी ने जकड़ लिए , जो पिताजी को खा  गई ।


हर कदम पर याद आते , सलाहों और दुआओं में,।

हमेशा ज़िंदा रहेंगे वो, हमारी सांसों और दास्तानों में।।

लिखता हूं आपके बारे में ,तो आंखों से पानी आ रहा ।

रोज कर कर के याद , आपके न होने का अहसास सता रहा।।

  नजदीक से देखी अमीरी  हमने, आपके ही राज में ।

कभी मांग लो पैसा , नहीं रुकने दिया कोई काज में ।।

याद आपकी जब भी आवे , चेहरा सिर्फ  खिलता  रहा।

जब भी अटका कही पर भी , आपका आशीर्वाद मिलता रहा ।।

आपके चरणों में  सदा मेरा नमन ।।







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